अब बच्चों के कंधों पर नहीं होगा भारी बस्तों का बोझ! बाल आयोग ने स्कूल शिक्षा विभाग को दी अहम सिफारिश”
MOHAMMAD RAJJAB October 31, 2026
रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों को भारी-भरकम बस्तों से राहत दिलाने की दिशा में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने महत्वपूर्ण पहल की है। बच्चों के कंधों, रीढ़ की हड्डी और शारीरिक मुद्रा पर भारी स्कूल बैग के संभावित दुष्प्रभावों को देखते हुए आयोग ने स्कूल शिक्षा विभाग को अनुशंसा पत्र भेजा है। इसमें नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए बस्ते का वजन निर्धारित करने सहित कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।
आयोग ने प्रो. यशपाल समिति की रिपोर्ट ‘शिक्षा बिना बोझ के’, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और NCERT की स्कूल बैग पॉलिसी 2020 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा है कि बच्चे के स्कूल बैग का वजन उसके शरीर के कुल वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों को अनावश्यक किताबों और कॉपियों के बोझ से बचाना तथा पढ़ाई को अधिक सहज और स्वास्थ्य के अनुकूल बनाना है।
किस कक्षा के बच्चों के बस्ते का कितना वजन रखने की सिफारिश?
आयोग ने अलग-अलग कक्षाओं के लिए बस्ते के वजन की सीमा प्रस्तावित की है।
कक्षा प्रस्तावित बस्ते का वजन
नर्सरी से यूकेजी नो बैग, नो टेक्स्टबुक
कक्षा 1 से 2 1.6 से 2.2 किलो
कक्षा 3 से 5 1.7 से 2.5 किलो
कक्षा 6 से 7 2 से 3 किलो
कक्षा 8 2.5 से 4 किलो
कक्षा 9 से 10 2.5 से 4.5 किलो
कक्षा 11 से 12 3.5 से 5 किलो
छोटे बच्चों को होमवर्क से भी राहत देने की सिफारिश
बाल आयोग ने प्राथमिक शिक्षा को बच्चों के लिए तनावमुक्त बनाने पर भी जोर दिया है। इसके तहत कक्षा पहली और दूसरी के विद्यार्थियों को होमवर्क नहीं देने की अनुशंसा की गई है। आयोग का मानना है कि शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को खेल-खेल में सीखने और उनकी रचनात्मक क्षमता विकसित करने के अवसर मिलने चाहिए।
साल में 10 दिन होंगे बैगलेस डे
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पैरा 4.26 का उल्लेख करते हुए आयोग ने साल में 10 दिन बैगलेस डे आयोजित करने का सुझाव दिया है।
इन दिनों बच्चों को बिना स्कूल बैग के विद्यालय बुलाकर पढ़ाई के अलावा व्यावहारिक गतिविधियों, कौशल विकास, खेलकूद और अन्य रचनात्मक कार्यों से जोड़ने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ वास्तविक जीवन का अनुभव देना है।
स्कूलों में डिजिटल तौल मशीन और बैग वेट रजिस्टर का सुझाव
बच्चों के बस्तों का वजन निर्धारित सीमा में रहे, इसके लिए आयोग ने स्कूलों में निगरानी व्यवस्था विकसित करने की सिफारिश की है।
प्रमुख सुझाव इस प्रकार हैं:
1.प्रत्येक स्कूल में डिजिटल तौल मशीन उपलब्ध कराने पर विचार किया जाए।
2.विद्यार्थियों के स्कूल बैग के वजन का रिकॉर्ड रखने के लिए बैग वेट रजिस्टर बनाया जाए।
3.पुस्तकों पर उनका वजन प्रिंट करने की व्यवस्था की जाए।
4.स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था हो, ताकि बच्चों को पानी की भारी बोतलें घर से न लानी पड़ें।
5.अनावश्यक रेफरेंस बुक्स के स्थान पर डिजिटल शिक्षण सामग्री को प्रोत्साहित किया जाए।
DIKSHA और e-Pathshala जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोर
आयोग ने भारी-भरकम रेफरेंस बुक्स और अतिरिक्त अध्ययन सामग्री का बोझ कम करने के लिए DIKSHA और e-Pathshala जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग को बढ़ावा देने का सुझाव दिया है। इससे विद्यार्थियों को जरूरी शैक्षणिक सामग्री डिजिटल माध्यम से उपलब्ध हो सकेगी और उन्हें अनावश्यक किताबें लेकर स्कूल नहीं जाना पड़ेगा।
सरकारी और निजी स्कूलों के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्कूल शिक्षा विभाग से इन अनुशंसाओं पर गंभीरता से विचार करने का अनुरोध किया है। आयोग चाहता है कि प्रदेश के सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त और निजी स्कूलों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि बस्ते के वजन को लेकर एक समान व्यवस्था लागू की जा सके।
अब शासन के फैसले का इंतजार
बाल आयोग की इस पहल से प्रदेश के लाखों स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, फिलहाल ये आयोग की ओर से स्कूल शिक्षा विभाग को भेजी गई अनुशंसाएं हैं। इन्हें अंतिम सरकारी आदेश या पूरे प्रदेश में लागू हो चुका नियम नहीं माना जाना चाहिए। अब देखना होगा कि स्कूल शिक्षा विभाग इन सुझावों पर क्या निर्णय लेता है और इन्हें लागू करने के लिए कब तक दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।
लालबत्ती न्यूज की खास बात: बच्चों की शिक्षा जरूरी है, लेकिन उनकी सेहत की कीमत पर नहीं। स्कूलों में पढ़ाई का माहौल ऐसा होना चाहिए, जहां बच्चों के ज्ञान का बोझ बढ़े, उनके कंधों का नहीं।
रिपोर्ट: लालबत्ती न्यूज | छत्तीसगढ़
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