छत्तीसगढ़ में है वो स्थान जहां मां दुर्गा ने किया था महिषासुर का वध, जानिए इससे जुड़ी आस्था, इतिहास और पौराणिक कथा
MOHAMMAD RAJJAB March 15, 2026
कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में स्थित बड़े डोंगर की पहाड़ी अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान कभी बस्तर रियासत की राजधानी भी रह चुका है। बताया जाता है कि महाराजा पुरुषोत्तम देव के शासनकाल में बड़े डोंगर को बस्तर की राजधानी बनाया गया था। हालांकि इस क्षेत्र का इतिहास इससे भी कहीं अधिक प्राचीन माना जाता है। यह इलाका आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं का महत्वपूर्ण केंद्र है। बस्तर क्षेत्र की प्रसिद्ध दशहरा परंपरा की झलक भी यहां देखने को मिलती है।
महिषासुर वध से जुड़ी है पौराणिक मान्यता
स्थानीय लोककथाओं के अनुसार सतयुग में महिषासुर नामक राक्षस ने देवताओं पर अत्याचार करना शुरू कर दिया था। उसकी शक्ति से देवता भयभीत हो गए और उन्होंने देवी पार्वती से सहायता की प्रार्थना की। तब माता पार्वती ने दुर्गा का रूप धारण कर महिषासुर से युद्ध किया। कहा जाता है कि यह भीषण युद्ध कई स्थानों पर हुआ और अंततः बड़े डोंगर की पहाड़ी पर देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया।
चट्टानों पर दिखाई देते हैं युद्ध के निशान
लोकमान्यता के अनुसार इस युद्ध के कुछ प्रतीक आज भी बड़े डोंगर की पहाड़ी पर मौजूद हैं। यहां की चट्टानों पर शेर के पंजों के निशान, भैंसे के सींग जैसी आकृतियां और माता के पदचिन्ह दिखाई देते हैं। श्रद्धालु इन निशानों को देवी दुर्गा और महिषासुर के युद्ध से जुड़ा प्रमाण मानते हैं और यहां पूजा-अर्चना करते हैं।

धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र
बड़े डोंगर के घने जंगल और पहाड़ियां धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। मान्यता है कि यहां 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास है। यही कारण है कि यह स्थान बस्तर क्षेत्र के लोगों के लिए गहरी श्रद्धा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है। इतिहास में जब बस्तर की राजधानी बड़े डोंगर हुआ करती थी, तब माता दंतेश्वरी से जुड़ा प्रमुख पर्व दशहरा भी यहीं से संचालित किया जाता था।
मंदिर तक पहुंचने का रास्ता
बड़े डोंगर कोंडागांव जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए दो प्रमुख मार्ग उपलब्ध हैं। पहला मार्ग कोंडागांव से जुगानी होते हुए बड़े डोंगर तक जाता है, जबकि दूसरा मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग 30 से फरसगांव के रास्ते यहां तक पहुंचता है।यात्रियों के लिए बस, टैक्सी और ऑटो जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। पहाड़ी के ऊपर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए कुछ दूरी पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है।
इतिहास और आस्था का जीवंत प्रतीक
बड़े डोंगर की पहाड़ी केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि बस्तर के समृद्ध इतिहास और लोक परंपराओं का जीवंत उदाहरण भी है। यहां आने वाले श्रद्धालु प्राकृतिक सौंदर्य, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक वातावरण का अनूठा अनुभव प्राप्त करते हैं।
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB
- MOHAMMAD RAJJAB

