July 30, 2026

मुंबई आतंकी हमले का मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा अमेरीका से लाया गया भारत

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महाराष्ट्र। आखिरकार भारत देश को 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड तहव्वुर हुसैन राणा का प्रत्यर्पण करवाने में सफलता प्राप्त की। देश को ये सफलता साल 2008 की तबाही के पीछे मुख्य साजिशकर्ता को न्याय के कटघरे में लाने के लिए वर्षों तक लगातार और ठोस प्रयासों के बाद मिली।

 

राणा को उसके प्रत्यर्पण के लिए भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि के तहत शुरू की गई कार्यवाही के तहत अमेरिका में न्यायिक हिरासत में रखा गया था। राणा ने प्रत्यर्पण को रोकने के लिए सभी कानूनी रास्ते आजमाए लेकिन उसका प्रत्यर्पण आखिरकार हो ही गया।

 

उल्लेखनीय है कि कैलिफोर्निया स्थित सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने साल 2023 में राणा के प्रत्यर्पण का आदेश दिया था। इसके बाद उस ने नौवें सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स में कई मुकदमे दायर किए जहां उसकी सभी केस खारिज हो गए।

 

बाद में उन्होंने एक सर्टिओरारी रिट, दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक आपातकालीन आवेदन दायर किया, जिन्हें भी अस्वीकार कर दिया गया।

 

भारत ने अमेरिकी सरकार से वांछित आतंकवादी के लिए आत्मसमर्पण वारंट हासिल करने के बाद दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण कार्यवाही शुरू की गई थी।

 

इसमें यूएसडीओजे व यूएस स्काई मार्शल की मदद से एनआईए ने पूरी प्रत्यर्पण प्रक्रिया के दौरान अन्य भारतीय खुफिया एजेंसियों, एनएसजी के साथ मिलकर काम किया।

 

इसमें भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने मामले को सफल निष्कर्ष पर ले जाने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ भी समन्वय किया।

 

राणा पर डेविड कोलमैन हेडली उर्फ ​​दाउद गिलानी और नामित आतंकवादी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और हरकत-उल-जिहादी इस्लामी (एचयूजेआई) के गुर्गों के साथ-साथ पाकिस्तान स्थित अन्य सह-षड्यंत्रकारियों के साथ मिलकर साल 2008 में मुंबई में विनाशकारी आतंकवादी हमलों को अंजाम देने की साजिश रचने का आरोप है।

 

इन घातक हमलों में कुल 166 लोग मारे गए और 238 से अधिक घायल हुए थे। एलईटी और एचयूजेआई दोनों को भारत सरकार द्वारा गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है।

 

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने राणा के प्रत्यर्पण बाद उसे दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट लाया गया जहां 64 वर्षीय पाकिस्तानी मूल के कनाडाई व्यवसायी राणा को विशेष एनआईए न्यायाधीश चंद्रजीत सिंह के कोर्ट में पेश किया गया।

 

एनआईए ने विभिन्न ईमेल सहित पुख्ता सबूतों का हवाला देते हुए राणा से पूछताछ के लिए 20 दिनों की हिरासत मांगी।

 

एजेंसी ने अदालत को बताया कि 2008 के हमलों के पीछे की बड़ी साजिश का पता लगाने के लिए राणा से पूछताछ जरूरी है। इसने अदालत को यह भी बताया कि हमलों के योजनाकार के रूप में उसकी भूमिका की जांच करनी है।

 

एनआईए ने कहा कि आपराधिक साजिश के हिस्से के रूप में, आरोपी नंबर 1, डेविड कोलमैन हेडली ने भारत आने से पहले राणा के साथ पूरे ऑपरेशन पर चर्चा की थी। संभावित चुनौतियों की आशंका को देखते हुए, हेडली ने राणा को अपने सामान और संपत्तियों का विवरण देते हुए एक ईमेल भेजा।

 

एनआईए ने अदालत को बताया कि हेडली ने राणा को इस साजिश में पाकिस्तानी नागरिकों इलियास कश्मीरी और अब्दुर रहमान की संलिप्तता के बारे में भी बताया, जो इस मामले में आरोपी हैं।

 

वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन और विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र मान ने एनआईए का प्रतिनिधित्व किया।

 

इस मांमले में सुनवाई से पहले, न्यायाधीश ने राणा से पूछा कि क्या उसके पास कोई वकील है वहीं राणा ने बताया कि उसके पास कोई वकील नहीं है, जिसके बाद जज ने दिल्ली लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की ओर से उसे वकील मुहैया कराया गया।

 

इसके बाद, पीयूष सचदेवा को राणा का वकील नियुक्त किया गया। दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। जज जल्द ही आदेश सुना सकते हैं।

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