September 14, 2026

Vat Savitri Vrat 2026: बरगद की परिक्रमा और 7 बार सूत बांधने का क्या है धार्मिक महत्व? जानें विस्तार से

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अक्षय वट और सावित्री की अटूट श्रद्धा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब सावित्री के पति सत्यवान के प्राण हरने यमराज आए थे, तब सावित्री ने इसी वट वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या की थी। अपनी चतुरता और पतिव्रत धर्म से उन्होंने यमराज को विवश कर दिया और सत्यवान के प्राण वापस ले आईं। बरगद के वृक्ष को ‘अक्षय’ माना गया है, जिसका अर्थ है जिसका कभी विनाश न हो। जिस तरह बरगद अपनी शाखाओं और जड़ों के जरिए सदियों तक जीवित रहता है, महिलाएं भी उसी लंबी आयु की कामना अपने पति के लिए करती हैं।

7 बार सूत बांधने के पीछे का तर्क और परंपरा
पूजा के दौरान बरगद की 7, 11, 21, 51 या 108 बार परिक्रमा करने का विधान है, लेकिन 7 बार कच्चा सूत बांधना अनिवार्य माना जाता है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

सात जन्मों का साथ: हिंदू धर्म में विवाह को सात जन्मों का बंधन माना गया है। 7 बार सूत लपेटना इस बात का प्रतीक है कि पति-पत्नी का रिश्ता अगले सात जन्मों तक अटूट रहे।
त्रिमूर्ति का वास: शास्त्र कहते हैं कि वट वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव का वास होता है। सूत बांधकर महिलाएं इन तीनों शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।
संकल्प की मज़बूती: कच्चा सूत नाजुक होता है, लेकिन जब इसे कई बार लपेट दिया जाता है तो यह मज़बूत हो जाता है। यह परिवार की एकता और रिश्तों की मज़बूती को दर्शाता है।

वट सावित्री का व्रत केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि विश्वास की शक्ति है। बरगद ऑक्सीजन का सबसे बड़ा स्रोत है और इसकी आयु सबसे लंबी होती है। हमारे पूर्वजों ने इसे धर्म से इसलिए जोड़ा ताकि प्रकृति का संरक्षण भी हो सके और परिवार में अनुशासन बना रहे।”

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