May 22, 2026

निजी स्कूलों ने बदला फैसला, 18 मई से फिर शुरू होंगे RTE के तहत प्रवेश, असहयोग आंदोलन रहेगा जारी

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रायपुर 17 मई 2026। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्रवेश को लेकर चल रहा विवाद अब कुछ हद तक सुलझता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने बड़ा फैसला लेते हुए इस वर्ष आरटीई के तहत प्रवेश नहीं देने के अपने निर्णय में बदलाव किया है। संगठन ने घोषणा की है कि 18 मई से प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी जाएगी।

इस फैसले से राज्य के हजारों गरीब, जरूरतमंद और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है। पिछले कुछ समय से निजी स्कूल संगठन और सरकार के बीच विभिन्न मांगों को लेकर विवाद चल रहा था। इसी के तहत निजी स्कूलों ने आरटीई प्रवेश प्रक्रिया रोकने का निर्णय लिया था, जिससे अभिभावकों और विद्यार्थियों में चिंता का माहौल बन गया था।
अब संगठन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रवेश प्रक्रिया फिर से बहाल करने का फैसला लिया गया है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि गरीब बच्चों की शिक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

हालांकि संगठन ने यह भी साफ किया है कि उनका असहयोग आंदोलन फिलहाल समाप्त नहीं हुआ है। निजी स्कूल संचालक अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रखेंगे। संगठन का कहना है कि सरकार को निजी स्कूलों की समस्याओं और आर्थिक मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

निजी स्कूल संघ की प्रमुख मांगों में से एक यह है कि सरकार शासकीय स्कूलों में प्रति विद्यार्थी होने वाले वास्तविक खर्च और निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि को सार्वजनिक करे। संगठन का कहना है कि वर्तमान में सरकार द्वारा दी जा रही प्रतिपूर्ति राशि वास्तविक खर्च की तुलना में काफी कम है, जिससे निजी स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

संगठन ने सरकार से लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो निजी स्कूलों को संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

आरटीई के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निशुल्क शिक्षा का अधिकार दिया जाता है। ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया रुकने से हजारों परिवार प्रभावित हो रहे थे। अब संगठन के फैसले के बाद अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।

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