“21वीं सदी के अनपढ़ फूल: चंदा, राजू, राजेश्वरी… जिनकी किताब कभी खुली ही नहीं”
MOHAMMAD RAJJAB May 15, 2025

उत्तर बस्तर कांकेर जिले के ग्राम रिसेवाडा के आश्रित वन क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली सच्चाई सामने आई है — यहाँ पारधी जनजाति के अनेक परिवार बीते लगभग 20 वर्षों से घने जंगलों के बीच बेहद दयनीय हालात में रह रहे हैं, जिनके बच्चे आज भी शिक्षा के बुनियादी अधिकार से वंचित हैं।
“सृजन समिति” की एक जांच टीम ने दिनांक 12 मई 2025 को स्थल निरीक्षण कर पाया कि जंगल के मध्य निवासरत श्री सुखराम शोरी (उम्र लगभग 40 वर्ष) का परिवार, जिसमें उनकी पत्नी, माता-पिता और छह संतानें शामिल हैं — आज तक स्कूल का दरवाजा भी नहीं देख सके हैं।
इन बच्चों के नाम हैं: चंदा (16 वर्ष), राजू (15 वर्ष), राजेश्वरी (13 वर्ष), जानकी (11 वर्ष), सूरज (7 वर्ष), चांदनी (5 वर्ष)। ये वो फूल हैं, जिनकी ज़िंदगी में अक्षर ज्ञान की खुशबू कभी आई ही नहीं। आज के डिजिटल और वैश्विक युग में ये बच्चे न तो क, ख, ग पहचानते हैं, न ही 1, 2, 3।
यह परिवार न केवल निरक्षर है, बल्कि इनके पास किसी भी प्रकार का पहचान पत्र नहीं है — न आधार कार्ड, न मतदाता पहचान पत्र, न राशन कार्ड, न आयुष्मान कार्ड, और न ही मजदूरी या कर्मकार कार्ड। केवल पिता धनीराम का आधार कार्ड बना हुआ है। दस्तावेजों के अभाव में ये न सरकारी योजनाओं का लाभ पा रहे हैं और न ही शिक्षा, स्वास्थ्य या भोजन सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं इन्हें मिल रही हैं।
परिवार बांस की वस्तुएं बनाकर और वनोपज एकत्र कर जैसे-तैसे जीवन काट रहा है। इनके आसपास पांच और परिवारों के कुल 34 सदस्य रहते हैं, जिनकी स्थिति भी कमोबेश वैसी ही है — कुछ के पास दूसरे ग्राम के दस्तावेज हैं, कुछ बच्चों ने केवल आठवीं तक पढ़ाई की है, परिवार के मुख्या, व कुछ सदस्य अपना नाम लिख सकते है ,बाकी पूरी तरह शिक्षा और पहचान से वंचित हैं। यह स्थिति संवैधानिक एवं विधिक प्रावधानों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है, जिनमें अनुच्छेद 14: समानता का अधिकार,अनुच्छेद 15: जाति आधारित भेदभाव से संरक्षण, अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार, अनुच्छेद 21A: 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार,अनुच्छेद 46: अनुसूचित जनजातियों का संरक्षण एवं उन्नयन, पाँचवीं अनुसूची: अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय अधिकारों का संरक्षण,RTE अधिनियम, 2009, आयुष्मान भारत योजना, खाद्य सुरक्षा अधिनियम, राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कोड, मनरेगा अधिनियम, आदि का निष्क्रिय क्रियान्वयन ही है l
सृजन समिति के सदस्यों — ने कहा सृजन समिति ऐसे जो मुख्य धारा से छूटे हुए हैं, उनकी हर संभव सहायता करेगी ,आधुनिक युग में 13-15-16 वर्ष के किशोर को अक्षर ज्ञान नही होना गंभीर चिंता और दुःख का विषय है । यह विषय मीडिया के माध्यम से पहले ही प्रशासन तक पहुँच चुका है आज हमने इस विषय को लेकर कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपा है, आगे इस विषय को लेकर जनजातीय आयोग, मानवाधिकार आयोग एवं बाल अधिकार संरक्षण आयोग को पत्र भेजकर मामले का संज्ञान लेने का निवेदन करके सभी परिवारों का तत्काल दस्तावेजीकरण, बच्चों का विद्यालय में त्वरित प्रवेश, स्वास्थ्य, पोषण, आवास और शिक्षा की समुचित व्यवस्था, वन अधिकार अधिनियम एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग करेंगे l आज ज्ञापन सौंपने समिति के सदस्य उत्तम जैन, ईश्वर कावड़े, मनीष जैन, गिरधर यादव,भूपेंद्र नाग, विजय प्रताप सिंग , धनेंद्र सिंह ठाकुर, अशोक कचलाम,भूपेश सिंह ठाकुर, पीयूष वलेचा, टाकेश जैन, नितेश सलाम, देवेश देवांगन उपस्थित थे ।
प्रेषक — सृजन समिति
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