July 25, 2026

फर्जी सर्टिफिकेट पर बने शिक्षक को कोर्ट ने भेजा जेल 15 साल तक करता रहा नौकरी

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Teacher News : फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के एक मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए शिक्षक को सजा सुनाई है। जांजगीर-चांपा के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, जैजैपुर राजेश खलखो की अदालत ने आरोपी चितरंजन प्रसाद कश्यप को कूट रचित अंकसूची एवं फर्जी खेलकूद प्रमाण पत्र का उपयोग कर शिक्षाकर्मी की नौकरी पाने का दोषी ठहराया।

प्रकरण के अनुसार, आरोपी चितरंजन प्रसाद कश्यप, पिता धोबीलाल, निवासी ग्राम मरघट्टी थाना हसौद, ने वर्ष 2007 में माल्दा स्थित पीतांबर हायर सेकेंडरी स्कूल से हायर सेकेंडरी परीक्षा विज्ञान विषय में दी थी। आधिकारिक परीक्षाफल के मुताबिक, भौतिकी विषय में उसे सप्लीमेंट्री प्राप्त हुई थी और कुल 500 अंकों में से 257 अंक हासिल हुए थे।
हालांकि, उसी वर्ष शिक्षाकर्मी पद के लिए आवेदन करते समय आरोपी ने अपने आवेदन पत्र में मिथ्या जानकारी प्रस्तुत की। उसने दावा किया कि उसे कुल 500 में 405 अंक प्राप्त हुए हैं। इसके समर्थन में आरोपी द्वारा एक फर्जी अंकसूची प्रस्तुत की गई, जिसमें भौतिकी विषय में सप्लीमेंट्री को डिस्टिंक्शन दर्शाया गया था और अन्य विषयों के अंक भी बढ़ाए गए थे। साथ ही, खेलकूद का कूट रचित प्रमाण पत्र भी आवेदन के साथ लगाया गया।
यह मामला वर्ष 2018 में सामने आया, जब ग्राम सेमरिया थाना जैजैपुर निवासी पोथीराम कश्यप ने आरोपी के खिलाफ लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक, जांजगीर-चांपा को दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि चितरंजन कश्यप ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त की है। शिकायत की जांच थाना हसौद द्वारा की गई, जिसमें आरोप सही पाए गए।

जांच के बाद आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (महत्वपूर्ण दस्तावेज की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) एवं 474 (जाली दस्तावेज का कब्जा) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। विवेचना पूर्ण कर वर्ष 2019 में अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय में विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी पाया। न्यायिक दंडाधिकारी ने आरोपी को धारा 420 के तहत 2 वर्ष, धारा 467/471 के तहत 3 वर्ष, धारा 468 के तहत 1 वर्ष एवं धारा 474 के तहत 1 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त अर्थदंड भी लगाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अर्थदंड की राशि अदा न करने की स्थिति में आरोपी को पृथक से अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

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