July 30, 2026

ग्रीन क्रेडिट योजना में बड़ा घोटाला उजागर, खोडरी वन परिक्षेत्र अधिकारी मनीष श्रीवास्तव निलंबित

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पेंड्रा 15 सितंबर 2025। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी ग्रीन क्रेडिट योजना का उद्देश्य देशभर में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करना है। लेकिन बिलासपुर वनमंडल के पेंड्रा क्षेत्र में इस योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। खोडरी वन परिक्षेत्र में इस योजना के तहत पौधारोपण में हुई अनियमितताओं को लेकर गंभीर कार्रवाई की गई है।
मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) बिलासपुर वृत्त ने खोडरी वन परिक्षेत्र अधिकारी मनीष श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई सितंबर माह में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर की गई है। जांच में पाया गया कि खोडरी परिक्षेत्र में ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत लगाए जाने वाले पौधे नियमों के विपरीत कोरबा जिले से मंगवाए जा रहे थे।

वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, योजना के तहत स्थानीय नर्सरी से पौधे लेने का प्रावधान है ताकि स्थानीय प्रजातियों का संरक्षण हो सके और पौधे नए माहौल में आसानी से पनप सकें। लेकिन खोडरी परिक्षेत्र में इस नियम को दरकिनार कर पौधों की सप्लाई कोरबा जिले से कराई गई। इससे न केवल योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं, बल्कि पौधों की गुणवत्ता और जीवित रहने की संभावना भी प्रभावित हुई है।

ग्रीन क्रेडिट योजना के तहत वृक्षारोपण कार्यों का सीधा संबंध लोगों को क्रेडिट पॉइंट्स देने और पर्यावरण सुधार से है। इस योजना में भ्रष्टाचार या अनियमितता का अर्थ है पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नुकसान पहुंचाना। विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि कुछ जगहों पर लगाए गए पौधे गायब मिले या उनकी देखरेख में लापरवाही की गई।
मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि विभाग इस मामले में पूरी तरह से सख्ती बरतेगा और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल निलंबित अधिकारी के खिलाफ विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह योजना आम लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का बेहतरीन प्रयास है, लेकिन इस तरह की लापरवाही से योजना की साख पर बुरा असर पड़ता है। लोगों ने मांग की है कि सभी परिक्षेत्रों में पौधारोपण कार्यों की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि गड़बड़ियों का समय पर पता लगाया जा सके।

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग अब पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।

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