June 10, 2026

CGBSE Vs CBSE : फर्जीवाड़ा करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ अभिभावकों का कलेक्टर को खुला पत्र, पूछा, फर्जीवाड़ा व मनमानी करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई क्यों नहीं? बिलासपुर में निजी स्कूलों की कथित मनमानी, फर्जी मान्यता और अभिभावकों के आर्थिक शोषण के खिलाफ अभिभावकों ने जिला कलेक्टर को खुला पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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बिलासपुर 7 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली को लेकर अभिभावकों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। जिले के सैकड़ों अभिभावकों ने जिला कलेक्टर को एक खुला पत्र लिखकर स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं और तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की है।

फर्जी मान्यता का बड़ा खुलासा
अभिभावकों के अनुसार, हाल ही में शहर के कुछ नामी निजी स्कूलों में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोप है कि स्कूलों ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की मान्यता लेकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के नाम पर प्रवेश दिया। इस धोखाधड़ी का खामियाजा सीधे बच्चों को भुगतना पड़ा, जिन्हें एक ही शैक्षणिक सत्र में दो बार वार्षिक परीक्षा देने के लिए मजबूर किया गया।

अभिभावकों का प्रदर्शन और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि अभिभावकों को आधी रात में कलेक्टर बंगले का घेराव करना पड़ा। अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित माता-पिता सड़कों पर उतर आए, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई के बजाय केवल आश्वासन ही मिलने का आरोप लगाया जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि यह मामला केवल एक घटना नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा है।

मनमानी फीस और आर्थिक शोषण के आरोप
खुले पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि बिलासपुर के कई निजी स्कूल आज भी मनमानी कर रहे हैं। अभिभावकों के अनुसार
अत्यधिक फीस वसूली की जा रही है
महंगी और अनावश्यक किताबें थोप दी जाती हैं
यूनिफॉर्म के लिए तय दुकानों से खरीदने का दबाव बनाया जाता है
इन सबके चलते अभिभावकों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल: कार्रवाई क्यों नहीं?
अभिभावकों ने प्रशासन से सवाल किया है कि जब इतना बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हो चुका है, तब भी अब तक कड़ी और उदाहरणात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि प्रशासन सख्त रुख अपनाए, तो कोई भी स्कूल नियमों की अनदेखी करने की हिम्मत नहीं करेगा।
प्रशासन से प्रमुख मांगें
अभिभावकों ने अपने खुले पत्र में प्रशासन से कई ठोस मांगें रखी हैं—

फर्जी तरीके से CBSE के नाम पर चल रहे स्कूलों पर तत्काल FIR दर्ज हो
जिले के सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची सार्वजनिक की जाए
फीस, किताबों और यूनिफॉर्म की मनमानी पर रोक लगे
दोषी स्कूल प्रबंधन पर सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाए
शिक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
अभिभावकों का मानना है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो “शिक्षा का अधिकार” केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा और आम जनता का भरोसा प्रशासन से उठ सकता है।

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