August 9, 2026

सहारा निवेशकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, रिफंड के लिए बताया यह रास्ता, दोबारा कोर्ट जाने की भी छूट

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बिलासपुर 23 जून 2026। सहारा इंडिया की विभिन्न कोऑपरेटिव सोसायटियों में वर्षों से फंसी जमाकर्ताओं की रकम को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निवेशक अपनी परिपक्व (मैच्योर) राशि की वापसी के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए CRCS-Sahara Refund Portal के माध्यम से दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में किसी प्रकार की विषम स्थिति उत्पन्न होती है तो निवेशकों को दोबारा हाईकोर्ट की शरण लेने की स्वतंत्रता रहेगी।

कोरिया और अनूपपुर के निवेशकों ने लगाई थी गुहार
मामला कोरिया जिले के बैकुंठपुर और मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के बिजुरी क्षेत्र के कई निवेशकों से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं में राम मूर्ति नायडू, भूदेव प्रसाद, मनोरमा देवी, सोली और अनीता बर्मन शामिल थे। इन लोगों ने सहारा इंडिया की विभिन्न योजनाओं और फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीमों में अपनी जमा पूंजी निवेश की थी।निवेशकों का आरोप था कि निवेश अवधि पूरी होने के बावजूद सहारा प्रबंधन ने उनकी मूल राशि और ब्याज का भुगतान नहीं किया। कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी जब राशि वापस नहीं मिली, तब उन्होंने वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।
सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया का दिया गया हवाला
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दीपक गुप्ता और केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता साक्षी मलिक उपस्थित हुईं। केंद्र सरकार और सहारा पक्ष ने अदालत को बताया कि सहारा निवेशकों की रिफंड प्रक्रिया पहले से ही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में संचालित की जा रही है।इसके बाद न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और चल रही प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है रिफंड प्रक्रिया
अदालत के समक्ष बताया गया कि:

सहारा-सेबी रिफंड खाते में जमा लगभग 24,979.67 करोड़ रुपये में से 5,000 करोड़ रुपये की पहली किस्त केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (CRCS) को हस्तांतरित की गई है।
निवेशकों को उनकी राशि आधार-लिंक बैंक खातों में सीधे और पारदर्शी तरीके से वापस की जा रही है।
पूरी रिफंड प्रक्रिया की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 18 जुलाई 2023 को सहारा निवेशकों के लिए CRCS-Sahara Refund Portal लॉन्च किया था।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद ने कहा कि चूंकि सहारा रिफंड मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है, इसलिए हाईकोर्ट द्वारा इस स्तर पर कोई अलग आदेश पारित करना उचित नहीं होगा।अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए निवेशकों को सलाह दी कि वे अपनी राशि प्राप्त करने के लिए निर्धारित पोर्टल पर दावा प्रस्तुत करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में रिफंड प्रक्रिया में कोई बाधा आती है या विशेष परिस्थिति उत्पन्न होती है तो वे पुनः हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है फैसला?
हाईकोर्ट के इस फैसले से सहारा में फंसी रकम वापस पाने की उम्मीद लगाए लाखों निवेशकों को राहत मिली है। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि फिलहाल रिफंड का वैधानिक और अधिकृत माध्यम CRCS-Sahara Refund Portal ही है और निवेशकों को उसी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

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