स्लग:सीआरपीएफ में निरीक्षक संवर्ग का भविष्य संकट में: पदोन्नति ठप, मनोबल पर गहरा असर
MOHAMMAD RAJJAB February 8, 2026
स्लग:सीआरपीएफ में निरीक्षक संवर्ग का भविष्य संकट में: पदोन्नति ठप, मनोबल पर गहरा असर
सुकमा:केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, आतंकवाद-रोधी अभियानों और कठिन कानून-व्यवस्था की परिस्थितियों में CRPF के जवान और अधिकारी लगातार अग्रिम मोर्चे पर तैनात रहते हैं। इस व्यवस्था में निरीक्षक (Inspector) स्तर के अधिकारी फील्ड लीडरशिप की अहम कड़ी होते हैं, लेकिन मौजूदा कैडर रिव्यू और पदोन्नति प्रक्रिया में आ रही बाधाओं के चलते निरीक्षक संवर्ग का भविष्य गंभीर संकट में नजर आ रहा है।
निरीक्षक न केवल प्रशासनिक दायित्व निभाते हैं, बल्कि जोखिम भरी परिस्थितियों में जवानों का नेतृत्व करते हुए निर्णायक भूमिका भी निभाते हैं। इसके बावजूद कैरियर ग्रोथ को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता ने इस संवर्ग में निराशा और असंतोष को गहरा कर दिया है। बल के भीतर यह भावना लगातार मजबूत हो रही है कि वर्षों की सेवा और समर्पण के बाद भी निरीक्षकों को उनका न्यायोचित अधिकार नहीं मिल पा रहा।
2019 का ग्रुप ‘B’ कैडर रिव्यू बना चिंता की जड़
वर्ष 2019 में लागू ग्रुप ‘B’ कैडर रिव्यू को प्रारंभ में सकारात्मक कदम माना गया, क्योंकि इससे कॉन्स्टेबल से सब-इंस्पेक्टर तक पदोन्नति के अवसर बढ़े। लेकिन इसी कैडर रिव्यू में निरीक्षक पद की भूमिका को कंपनी सेकेंड-इन-कमांड (2IC) से घटाकर प्लाटून कमांडर तक सीमित कर दिया गया।
इस बदलाव से निरीक्षक रैंक की प्रशासनिक और नेतृत्वात्मक हैसियत कमजोर हुई और उनके दीर्घकालिक कैरियर ग्रोथ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
DAGO भर्ती और लोकल प्रमोशन में असंतुलन
वर्ष 2010 से 2025 तक डायरेक्टली अपॉइंटेड गजेटेड ऑफिसर (DAGO) की भर्ती नियमित रूप से होती रही, जबकि निरीक्षक जैसे लोकल प्रोमोटी अधिकारियों को उनके निर्धारित कोटे के अनुरूप पदोन्नति नहीं मिल सकी।
इससे कैडर संरचना में असंतुलन पैदा हो गया। निरीक्षकों का सवाल है कि जब डायरेक्ट असिस्टेंट कमांडेंट (AC) की भर्ती लगातार हो रही है, तो निरीक्षक से AC का लोकल प्रमोशन क्यों ठप है?
प्रस्तावित ग्रुप ‘A’ कैडर रिव्यू से बढ़ी आशंका
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब प्रस्तावित नए ग्रुप ‘A’ कैडर रिव्यू में लगभग 1050 असिस्टेंट कमांडेंट पदों की संभावित कटौती की चर्चा सामने आई।
यदि यह प्रस्ताव लागू हुआ, तो निरीक्षक से AC पदोन्नति की पहले से कमजोर श्रृंखला और अधिक बाधित हो जाएगी। इससे वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों की उम्मीदों को गहरा झटका लग सकता है।
15–16 वर्षों से एक ही रैंक में अटके अधिकारी
पदोन्नति में देरी का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि 2009 बैच के निरीक्षक आज भी असिस्टेंट कमांडेंट पदोन्नति की राह देख रहे हैं। वहीं, 2006 बैच के कई अधिकारी ऐसे हैं, जिन्होंने लगभग 16 वर्षों की सेवा के बावजूद निरीक्षक से आगे बढ़ने का अवसर नहीं पाया।
वर्तमान हालात में यह आशंका भी जताई जा रही है कि कई अधिकारी एक ही रैंक में सेवानिवृत्त होने को मजबूर हो सकते हैं।
असमान पदोन्नति संरचना से गिरता मनोबल
निरीक्षक संवर्ग का कहना है कि मौजूदा पदोन्नति ढांचा असमान है। जहां कुछ अधिकारियों को 20 वर्षों की सेवा में चार पदोन्नतियां मिल रही हैं, वहीं सब-इंस्पेक्टर के रूप में भर्ती हुए कई अधिकारियों को एक भी सुनिश्चित पदोन्नति नहीं मिल पा रही।
यह स्थिति न केवल सेवा नियमों की भावना के विपरीत है, बल्कि बल के भीतर मनोबल और अनुशासन पर भी प्रतिकूल असर डाल रही है।
स्पष्ट और न्यायोचित नीति की मांग
निरीक्षक संवर्ग का आरोप है कि ग्रुप ‘B’ और ग्रुप ‘A’ दोनों कैडर रिव्यू में उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति का अभाव है। आज भी यह तय नहीं है कि निरीक्षक रैंक की दीर्घकालिक प्रशासनिक स्थिति क्या होगी और उनके लिए कैरियर ग्रोथ का रास्ता कैसा होगा।
इस अनिश्चितता ने पूरे संवर्ग को गहरी चिंता में डाल दिया है और अब न्यायोचित हस्तक्षेप की मांग तेज होती जा रही है।
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