September 8, 2026

CG News: आरटीई के तहत प्रवेश न देने वाले निजी स्कूलों की मान्यता होगी रद्द, शिक्षा विभाग का दावा.. आरटीई प्रतिपूर्ति राशि दूसरे राज्यों से बेहतर

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CG News: रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों में आरटीआई के तहत प्रवेश को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई निजी विद्यालय प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में व्यवधान डालता है, तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

 

विभाग ने चेतावनी दी है कि ऐसे मामलों में विद्यालय की मान्यता तक रद्द की जा सकती है। विभाग द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई), 2009 अप्रैल 2010 से प्रभावी है। इसके तहत प्रदेश के गैर-अनुदान प्राप्त निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर, दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। इन सीटों पर बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर प्रवेश दिलाना अनिवार्य है।

 

CG News: प्रतिपूर्ति राशि का पारदर्शी भुगतान

आरटीई के तहत निजी विद्यालयों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इसके बदले राज्य सरकार द्वारा प्रति छात्र व्यय के आधार पर विद्यालयों को प्रतिपूर्ति राशि प्रदान की जाती है। यह राशि सरकारी स्कूलों में प्रति बच्चे पर होने वाले खर्च या संबंधित निजी विद्यालय की फीस दोनों में से जो कम हो उसके आधार पर तय की जाती है।

 

CG News: अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर व्यवस्था​

शिक्षा विभाग ने कहा कि, छत्तीसगढ़ में प्रतिपूर्ति राशि कई राज्यों के मुकाबले बेहतर या समकक्ष है। राज्य में कक्षा 1 से 5 तक प्रति छात्र 7,000 रुपये और कक्षा 6 से 8 तक 11,400 रुपये वार्षिक दिए जाते हैं। तुलना में मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में यह राशि कम है, जबकि कुछ राज्यों में अधिक है। बावजूद इसके, छत्तीसगढ़ की व्यवस्था को संतुलित बताया गया है।

 

CG News: लाखों छात्रों को मिल रहा लाभ

वर्तमान में प्रदेश के 6,862 निजी विद्यालयों में आरटीई के तहत लगभग 3 लाख 63 हजार 515 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस वर्ष भी कक्षा पहली की करीब 22,000 सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि आरटीई के प्रावधानों का पालन करना सभी निजी विद्यालयों की वैधानिक जिम्मेदारी है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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