वन विभाग जवाब दे कहा गया हिमालयन भालू मर गया या लापरवाही ने मार डाला? ठण्ड के मौसम में जंगल सफारी लाये जा रहे हिमालयन भालू की गर्मी से मौत? वन विभाग के दावों वन्यजीव प्रेमी सिंघवी ने किया खारिज
MOHAMMAD RAJJAB February 24, 2025
रायपुर 24 फरवरी 2025। एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत 15 फरवरी को नागालैंड जूलॉजिकल पार्क, दीमापुर से जंगल सफारी रायपुर लाये जा रहे एक नर उम्र 6 वर्ष (नाम कल्लू) और एक मादा उम्र 7 वर्ष (नाम बेंबू) हिमालयन ब्लैक भालू में से नर भालू की मृत्यु रास्ते में हो गई। इसको लेकर वन विभाग ने मीडिया में दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में जगह-जगह गाड़ी को रोक कर जांच की गई, ऐसे में हिमालयन भालू की गर्मी के कारण मौत हो गई। यह भी बताया गया कि वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने पश्चिम बंगाल से वन्य जीवों की तस्करी होने की जानकारी दी थी इस कारण से वहां के वन अधिकारी गाडियों को रोक कर जांच कर रहे थे। इसके चलते हिमालयन भालू ला रहा वाहन घंटो फंसा रहा।
वाहन रोकने का प्रश्न ही नहीं उठता
वन विभाग के उक्त दावे को खोखला और जनता को दिग्भ्रमित करने वाला बताते हुए रायपुर के नितिन सिंघवी ने कहा कि जो गाड़ी भालू को लेकर आ रही थी उसको रोकने का प्रश्न ही नहीं उठता। क्योंकि वाहन चालक के पास नागालैंड जूलॉजिकल पार्क द्वारा सभी संबंधितों के लिए जारी प्रमाण पत्र था जिसमें लिखा था कि लॉरी-ट्रक सहित दो अन्य गाड़ियां जिन्दा जानवर ले कर जा रही हैं रास्ते में इन्हें आवश्यक सहायता मुहैया करवाई जाये, तत्काल और सुरक्षित रूप से निकल जाने दिया जाए और इन वाहनों से टोल टैक्स भी नहीं लिया जाए। प्रमाण पत्र में लिखा था कि वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत इन्हें किसी भी प्रकार के ट्रांजिट परमिट की जरूरत नहीं है। अगर वाहनों को रोका जा रहा था हो छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल के अधिकारियों से बात कर हस्तक्षेप क्यों नहीं किया? जबकि छत्तीसगढ़ से जो हिरण ले गए थे उनको तो ले जाने में कहीं पर देरी नहीं हुई और ना ही कोई चेकिंग हुई।
गर्मी से मरने की बात भी गलत
सिंघवी ने कहा जहां तक गर्मी से भालू मरने की बात है वन विभाग का यह दावा भी खोखला है क्योंकि उत्तर पूर्व से लेकर छत्तीसगढ़ तक ऐसी गर्मी नहीं पड़ रही कि भालू की मौत गर्मी से हो जाए। जानकारी के अनुसार असम से ही 2014 की तेज गर्मी में ट्रेन से भालू लाये गए थे, 12 घंटे हावड़ा में ट्रेन रुकी रही तब कोई भी भालू नहीं मरा था। नियमानुसार वन विभाग जानवरों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए वातानुकूलित वाहन उपयोग करता है, उनमें स्प्रिंकलर भी लगा रहता है। अगर वाहन वातानुकूलित नहीं था तो उसमे ठंडी जगह रहने वाले हिमालयन भालू क्यों लाया गया? दोनों भालू जब नागालैंड से निकले थे तो वहां के डॉक्टर ने स्वास्थ प्रमाण पत्र दिया था जिसमें बताया था कि भालू स्वस्थ है उसे कोई स्पर्शजन्य-रोग और संक्रामक रोग नहीं है वो ट्रांसपोर्टेशन के लिए फिट है।
गाड़ियों में लगे हैं सीसीटीवी
सिंघवी ने कहा कि एक मिनिट में तो गर्मी लगने से भालू की मौत नहीं हुई होगी, उसकी तबियत धीरे धीरे खराब हुई होगी। छत्तीसगढ़ वन विभाग के वन प्राणियों को लाने ले जाने वाले वाहनों में सीसीटीवी लगे हुए हैं। जिसका लिंक सामने वाहन चला रहे ड्राइवर, डॉक्टर, उच्च अधिकारियों सहित प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वनप्राणी) तक को दिया जाता रहा है क्या किसी को भी नहीं दिखा कि भालू की तबियत खराब हो रही है।
क्या डॉक्टर गाड़ी के साथ नहीं था?
सिंघवी ने कहा कि रास्ते का एक वीडियो बताता है कि चेकिंग के दौरान अधिकारी स्तर का डॉक्टर वहां नहीं था। वाहन को ढाई मिनिट में ही आगे जाने दिया गया था। सिंघवी ने मांग की कि बताया जाये कि डॉक्टर कहां थे? उनकी गाडी साथ साथ चल रही थी कि नहीं इस बात की जांच टोल नाके में लगे सीसीटीवी से की जानी चाहिए।
डॉक्टरों के हवाई जहाज प्रेम ने ली भालू की जान
चर्चा अनुसार जंगल सफारी से जब हिरण ले जाए गए तो एक डॉक्टर हिरनों के साथ गया और दूसरा हवाई जहाज से। लौटते में एक डॉक्टर भालुओं के साथ आया और दूसरे डॉक्टर का कहना है कि वह हवाई जहाज से आया। जबकि अधिकारियों का कहना है कि दोनों ही डॉक्टर भालू के साथ आए, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) को बताना चाहिए की सत्यता क्या है।
सिंघवी ने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

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