CG- नक्सली हमले में सर पर लगी थी गोली, जवान का फिर से कर दिया नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तबादला, हाईकोर्ट ने लगायी रोक
MOHAMMAD RAJJAB February 27, 2025
Bilaspur Highcourt: नक्सली हमले में घायल जवान की घोर नक्सल प्रभावित जिला (सुकमा) में ट्रांसफर पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। दरअसल सारंगढ़ के रहने वाले जवान दिनेश ओगरे दूसरी बटालियन, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, सकरी में आरक्षक (कॉन्सटेबल) के पद पर पदस्थ थे। सेनानी, दूसरी वाहिनी द्वारा एक आदेश जारी कर दिनेश ओगरे का स्थानांतरण सकरी, जिला-बिलासपुर से एक कम्पनी सुकमा स्थानांतरण कर दिया गया। तबादला आदेश से सुब्ध होकर दिनेश ओगरे ने हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं स्वाति सराफ के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष रिट याचिका दायर कर स्थानांतरण आदेश को चुनौती दी गई। अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं स्वाति सराफ के जरिये हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की। याचिका में यह तर्क दिया गया कि पूर्व में वर्ष 2016 में याचिकाकर्ता पामेड़ जिला-बीजापुर में कान्सटेबल के पद पर पदस्थ था।
हेलीपेड सुरक्षा के दौरान नक्सलियों द्वारा की गई गोलाबारी में याचिकाकर्ता के सिर में गोली लगी थी। वो गंभीर रूप से घायल हुआ था। इसके साथ ही वर्ष 2018 में याचिकाकर्ता का एक मेजर एक्सीडेन्ट होने के कारण उसके बाएँ पैर में स्टील की रॉड लगी है एवं उसे तेज चलने एवं दौड़ने में दिक्कत होती है।
चूंकि जिला-सुकमा एक अति संवेदनशील एवं घोर नक्सली जिला है, चूंकि आवेदक की शारीरिक एवं मानसिक स्थिति घोर नक्सली जिले में सेवा देने योग्य नहीं है। यदि याचिकाकर्ता घोर नक्सली जिला-सुकमा में ज्वाईन करता है तो नक्सलियों के टारगेट में होने के कारण याचिकाकर्ता की जान को खतरा है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट में 3 सितंबर 2016 को विशेष आसूचना शाखा, पुलिस मुख्यालय इसके साथ ही दिनांक 18.03.2021 को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), पुलिस मुख्यालय, रायपुर द्वारा जारी किये गये सर्कुलर का हवाला दिया। जिसमें यह प्रावधान है कि नक्सली हमले में घायल जवानों से उनकी शारीरिक क्षमतानुसार कार्य लिया जाना चाहिये। ऐसे जवानों की पदस्थापना घोर नक्सली जिले में नहीं किया जाना चाहिये। इसके साथ ही समय-समय पर उनके स्वास्थ्य के संबंध में समुचित जानकारी प्राप्त किया जाना चाहिये।
परन्तु याचिकाकर्ता के मामले में सेनानी, दूसरी बटालियन द्वारा उपर्युक्त तर्णित सर्कुलर का घोर उल्लंघन करते हुए याचिकाकर्ता का घोर नक्सली जिला-सुकमा में स्थानांतण कर दिया गया। हाईकोर्ट बिलासपुर द्वारा उक्त रिट याचिका की सुनवाई के पश्चात् याचिकाकर्ता का जिला-सुकमा हेतु जारी स्थानांतरण आदेश एवं रिल्हीविंग आदेश पर स्थगन (स्टे) कर दिया गया।
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