डिप्टी सीएम अरुण साव और केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू के क्षेत्र का मामला टेंडर खुलने से पहले ही काम पूरा! लोरमी विद्युत विभाग कार्यशैली पर गंभीर सवाल,कागजों में 22/9/26/ को खुलेगी निविदा, जमीन पर पहले ही खड़े हो गये खंभे और ट्रांसफार्मर..
MOHAMMAD RAJJAB September 20, 2026
टेंडर खुलने से पहले ही काम पूरा! लोरमी विद्युत विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल
कागजों में 22 सितंबर को खुलेगी निविदा, जमीन पर पहले ही खड़े हो गए खंभे और ट्रांसफार्मर;अब सवाल_ किसके आदेश पर हुआ काम?

मुंगेली/लोरमी। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के मुंगेली संभाग अंतर्गत लोरमी वितरण केंद्र में विद्युत कार्यों को लेकर उपलब्ध दस्तावेजों और मौके पर मौजूद साक्ष्यों के बीच ऐसा विरोधाभास सामने आया है, जिसने विभाग की कार्यशैली और निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला कंचन हॉस्पिटल, आरोग्यम हॉस्पिटल और लोरमी बस स्टैंड क्षेत्र में किए गए विद्युत विस्तार कार्यों से जुड़ा है। CSPDCL मुंगेली संभाग द्वारा 08 सितंबर 2026 को टेंडर नोटिस क्रमांक 524/Tender/2026-27/T-448/2775 जारी किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार तीन विद्युत आपूर्ति संबंधी कार्यों की अनुमानित लागत करीब ₹3,97,519 है और निविदा जमा करने तथा खोलने की निर्धारित तारीख 22 सितंबर 2026 दोपहर 3 बजे है।
लेकिन सवाल यह है कि जब टेंडर प्रक्रिया अभी पूरी ही नहीं हुई, तो संबंधित स्थानों पर 11 KV लाइन, विद्युत खंभे और ट्रांसफार्मर पहले ही कैसे स्थापित हो गए?
अगर काम पहले ही पूरा हो चुका था तो निविदा में भाग लेने वाले दूसरे पंजीकृत ठेकेदारों के लिए वास्तविक प्रतिस्पर्धा का क्या अर्थ रह जाता है? और यदि किसी विशेष अनुमति या पूर्व स्वीकृति के आधार पर कार्य पहले कराया गया था, तो वह आदेश सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?

किसके आदेश पर निकली सामग्री और किसके निर्देश पर हुआ काम?
इस मामले में जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है कि वर्क ऑर्डर कब जारी हुआ, तकनीकी स्वीकृति कब मिली, विभागीय स्टोर से सामग्री किस आदेश पर निकली, साइट पर काम शुरू करने की अनुमति किसने दी और माप पुस्तिका में कार्य की तारीख क्या दर्ज है?
मामले में लोरमी में पदस्थ सहायक यंत्री मनीष श्रीवास और मुंगेली के कार्यपालन यंत्री नंदकिशोर सोनी की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या पूरे मामले की जानकारी या अनुमति वरिष्ठ स्तर पर थी।
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि कंचन हॉस्पिटल और आरोग्यम हॉस्पिटल से जुड़े कार्यों के लिए कथित तौर पर ₹5-5 लाख का लेनदेन हुआ और बाद में टेंडर प्रक्रिया को औपचारिकता के रूप में अपनाया गया। यह बेहद गंभीर दावा है। यदि उपलब्ध प्रमाणों की जांच में ऐसा लेनदेन साबित होता है तो मामला केवल टेंडर प्रक्रिया की अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा।
इसके अलावा उपभोक्ताओं से फेल ट्रांसफार्मर के लिए कथित ₹15 हजार, पंप कनेक्शन के लिए ₹20 हजार, नए कनेक्शन तथा पावर कनेक्शन के नाम पर कथित रूप से बड़ी रकम मांगने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। इन सभी शिकायतों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
अरुण साव और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के क्षेत्र का मामला
गौर करने वाली बात यह भी है कि पूरा मामला लोरमी क्षेत्र का है, जिसका विधानसभा प्रतिनिधित्व वर्तमान में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव करते हैं। वहीं लोरमी बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जिसका प्रतिनिधित्व केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तथा बिलासपुर सांसद तोखन साहू करते हैं।
यह किसी जनप्रतिनिधि पर व्यक्तिगत आरोप का विषय नहीं, बल्कि उनके क्षेत्र में संचालित सरकारी विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल है।
क्या कार्यवाही होगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच में टेंडर प्रक्रिया से पहले काम कराया जाना, नियमों की अनदेखी या आर्थिक अनियमितता प्रमाणित होती है तो क्या सिर्फ स्थानीय अधिकारी और ठेकेदार पर कार्रवाई होगी, या जिस स्तर से अनुमति, स्वीकृति, सामग्री निर्गमन, निरीक्षण और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ी, उस पूरे प्रशासनिक चैन की जवाबदेही तय होगी?
यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो क्या उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी?
लालबत्ती न्यूज़ ,ने संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए सहायक यंत्री मनीष श्रीवास् और कार्यपालन यंत्री नंदकिशोर सोनी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं किया गया। अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अब निगाहें CSPDCL के वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं—क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी, दस्तावेज सामने आएंगे और यदि भ्रष्टाचार या अनियमितता प्रमाणित हुई तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?
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