तहसीलदार की पत्नी की दो टूक, हक लिये बिना नहीं जायेगी, प्रशासन की कार्रवाई बनी सवालों के घेरे में पति चाहिए, इंसाफ चाहिए’: ससुराल की दहलीज पर बहुओं के धरने का सातवां दिन,
MOHAMMAD RAJJAB June 22, 2025
बालोद 22 जून 2025। छत्तीसगढ़ के एक प्रतिष्ठित अधिकारी परिवार में घरेलू विवाद ने अब सड़क से कोर्ट तक का मोड़ ले लिया है। तहसीलदार की पत्नी और मत्स्य विभाग के जिला अधिकारी सतीश चंद्र गुप्ता की दोनों बहुएं—रेणु गुप्ता व वंदना गुप्ता—बीते सात दिनों से अपने ससुराल की दहलीज पर धरने पर बैठी हैं, पति के साथ रहने के अपने अधिकार की मांग करते हुए।हालात इतने गंभीर हो गए कि शुक्रवार शाम 4 बजे से दोनों बहुओं ने भूख हड़ताल शुरू कर दी, लेकिन प्रशासन ने उन्हें जबरन हटाते हुए प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। इस कार्रवाई को लेकर प्रशासन की निष्पक्षता पर अब सवाल उठने लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
रेणु गुप्ता, तहसीलदार राहुल गुप्ता की पत्नी हैं, जबकि वंदना गुप्ता छोटे बेटे रोहित गुप्ता की पत्नी हैं। दोनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, मारपीट की गई, गर्भपात के लिए मजबूर किया गया और अंततः घर से निकाल दिया गया।
वंदना का कहना है कि उनके पति को छतरपुर में कहीं छिपा दिया गया है, ताकि वह उनके सामने न आ सके। वहीं, रेणु का आरोप है कि उनके पति राहुल गुप्ता और उनके ससुराल वालों ने सरकारी पद का दुरुपयोग कर न्याय पाने के उनके रास्ते बंद कर दिए हैं।
तहसीलदार पति का पक्ष: “पत्नी से जान को खतरा है”
दंतेवाड़ा में पदस्थ तहसीलदार राहुल गुप्ता का कहना है कि उनकी पत्नी हिंसक है और उनके माता-पिता से अक्सर झगड़ा करती है। उन्होंने कुटुंब न्यायालय में यह भी कहा है कि पत्नी के साथ रहना उनके जीवन के लिए खतरा है। वह स्पष्ट कर चुके हैं कि पत्नी के साथ किसी भी हालत में नहीं रहना चाहते, चाहे दहेज की चीजें लौटा दी जाएं।
ससुर बोले: बेटा बार-बार कहता है, “मर जाऊंगा लेकिन पत्नी संग नहीं रहूंगा”
ससुर सतीश चंद्र गुप्ता ने कहा कि दोनों बेटों की शादी प्रेम विवाह के रूप में हुई थी। लेकिन अब बेटा मानसिक रूप से परेशान है और कहता है कि वो पत्नी के साथ नहीं रह सकता।
बहुओं का कहना: “शादी की है, तो ससुराल में रहने का हक है”
रेणु और वंदना दोनों का कहना है कि वे कानूनी रूप से शादी कर इस घर में आई हैं और उन्हें अपने पतियों के साथ इसी घर में रहना है। वे कहती हैं,
मामला कोर्ट में विचाराधीन
पति-पत्नी के बीच का विवाद कुटुंब न्यायालय में लंबित है। काउंसलिंग के कई प्रयास विफल हो चुके हैं। अब दोनों पक्ष अपने-अपने दावे के साथ कोर्ट की शरण में हैं, लेकिन सवाल ये है कि जब बहुएं घर में रहना चाहती हैं, तो क्या उन्हें ससुराल से बेदखल करना वैधानिक है?न्याय की राह पर बैठी इन बहनों की लड़ाई सिर्फ पारिवारिक नहीं, सामाजिक चेतना की भी पुकार है। प्रशासन की कार्रवाई और पति-पत्नी के बीच की यह जंग अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है।
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