September 14, 2026
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शिक्षा विभाग से जुड़े कथित 218 करोड़ रुपये के वित्तीय अनियमितता मामले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। इस गंभीर मामले में शिक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तत्कालीन कार्यालय में पदस्थ रहे वर्ग–2 कर्मचारी माया कसार और योगेंद्र कश्यप को निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश जारी होने के साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान दोनों कर्मचारियों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।

दरअसल, बीते तीन वर्षों के दौरान कोषालय से निकाले गए लगभग 218 करोड़ रुपये के लेन-देन को लेकर कराए गए ऑडिट में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 से 2025 के बीच कैश बुक, वाउचर और बिल रजिस्टर जैसे महत्वपूर्ण वित्तीय अभिलेख या तो गायब पाए गए हैं या अधूरे हैं। इन दस्तावेजों के अभाव में करोड़ों रुपये के भुगतान और खर्च की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे बड़े स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) संजय जायसवाल पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। हालांकि, पूर्व बीईओ संजय जायसवाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने दावा किया है कि उनके कार्यकाल के दौरान शिक्षकों का वेतन नियमित रूप से भुगतान किया गया और किसी भी प्रकार का गबन या वित्तीय अनियमितता नहीं हुई।

संजय जायसवाल के अनुसार, उनका कार्यकाल अक्टूबर 2022 से सितंबर 2025 तक रहा। इस अवधि में उन्होंने सभी वित्तीय दस्तावेज—जिनमें बिल, वाउचर और कैश बुक शामिल हैं—11 दिसंबर 2025 को वर्तमान ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को विधिवत सौंप दिए थे। उन्होंने यह भी कहा कि दस्तावेज सौंपने की रसीद उनके पास मौजूद है, जो उनके दावों को प्रमाणित करती है।
पूर्व बीईओ ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित कक्ष प्रभारी योगेंद्र कश्यप को समय-समय पर मौखिक और लिखित रूप से आवश्यक निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद दस्तावेजों का समुचित संधारण नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि इसी लापरवाही के कारण कई वित्तीय अभिलेख अधूरे रह गए। कक्ष प्रभारी को इस संबंध में नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया।

वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) एफ.आर. वर्मा ने ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि प्रारंभिक जांच में कुछ गंभीर कमियां सामने आई हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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