October 27, 2026

महिला IPS अंकिता शर्मा के समर्थन में उतरे डॉ. फारूख अली, KJS ढिल्लों की टिप्पणी पर उठाए सवाल। बोले— महिला अधिकारी के साहस और योगदान को विवादों में उलझाने के बजाय उनके कर्तव्य और समर्पण का होना चाहिए सम्मान।

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सुकमा:छत्तीसगढ़ कैडर की IPS अधिकारी अंकिता शर्मा के शस्त्र पूजा के बाद AK-47 से फायरिंग करने को लेकर उठे सवालों पर बस्तर के सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. फारूख अली ने सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी KJS ढिल्लों की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने महिला IPS अधिकारी का समर्थन करते हुए सवाल उठाया कि आखिर महिलाओं की तरक्की और उनके साहसिक कार्यों से कुछ लोगों को परेशानी क्यों होती है?

डॉ. फारूख अली ने कहा कि शस्त्र पूजा भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपरा है। इस परंपरा के तहत आयोजित कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाना और एक महिला अधिकारी के कार्यों को विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को सुरक्षा संबंधी नियमों या प्रक्रियाओं पर आपत्ति है, तो उस पर तथ्यों और नियमों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।

बस्तर में महिला अधिकारियों के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

डॉ. फारूख अली ने कहा कि IPS अंकिता शर्मा बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ अभियान के दौरान अपनी जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं। ऐसे क्षेत्र में कर्तव्य निर्वहन करने वाले अधिकारियों के साहस, कार्यक्षमता और समर्पण को भी चर्चा में जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश के लिए गर्व का विषय है और उनके योगदान का सम्मान किया जाना चाहिए।

पुलिस स्मृति दिवस का किया उल्लेख

पुलिस स्मृति दिवस का उल्लेख करते हुए डॉ. फारूख अली ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले पुलिस जवानों का बलिदान सदैव स्मरणीय है। उन्होंने KJS ढिल्लों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके अनुसार, पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने वाली पोस्ट दिखाई नहीं दी, जबकि महिला IPS अधिकारी के शस्त्र पूजा कार्यक्रम में फायरिंग का विषय चर्चा में रहा।

उन्होंने आम नागरिकों के लाइसेंसी हथियारों और उनके इस्तेमाल से जुड़े नियमों का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि सुरक्षा मानकों और नियमों पर चर्चा करते समय सभी मामलों में एक समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

‘नियमों पर सवाल हों, लेकिन महिला अधिकारी के योगदान का भी हो सम्मान’

डॉ. फारूख अली ने आरोप लगाया कि KJS ढिल्लों की टिप्पणी अनावश्यक विवाद को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी के कार्यों का मूल्यांकन तथ्यों, नियमों और उसके कर्तव्य के आधार पर होना चाहिए। महिला अधिकारियों की उपलब्धियों को विवादों के नजरिये से देखने के बजाय उनके योगदान और समर्पण को महत्व दिया जाना चाहिए।

अंत में डॉ. फारूख अली ने KJS ढिल्लों से उनकी आपत्तियों के पीछे के तर्क स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश की सेवा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान होना चाहिए। महिलाओं की उपलब्धियों को बेवजह विवाद का विषय बनाने के बजाय उनके साहस, क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण को स्वीकार किया जाना चाहिए।

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